उम्मीद पर दुनिया कायम है

अंधेरों ने लाखों बार रोशनी को रोकना चाहा,
तूफ़ानों ने हर कदम पर सफ़र को टोकना चाहा।
पर हर सुबह ने फिर से कहा, उम्मीद पर दुनिया कायम है।

सूखी धरती भी कभी बादलों को पुकारती है,
टूटी शाखों पर भी प्रकृति नयी कोंपलें सँवारती हैं।
हर मौसम यही समझाता है, उम्मीद पर दुनिया कायम है।

जब रास्ते थक जाते हैं और मंज़िल भी धुँधली लगती है,
जब अपने ही सवाल बन जाएँ और दुनिया कुछ खाली ही लगती है।
तब दिल चुपके से कह उठता है, उम्मीद पर दुनिया कायम है।

गिरना अगर तक़दीर है तो उठना भी कहानी है,
हर दर्द के पीछे कहीं मुस्कुराती ज़िंदगानी है।
हर आँसू यही सिखाता है, उम्मीद पर दुनिया कायम है।

जो खो गया वो किस्सा है, जो आने वाला है वो कल है,
हर रात की गोद में छुपा एक सुनहरा सा पल है।
हर धड़कन यही दोहराती है, उम्मीद पर दुनिया कायम है।

-प्रशान्त सेठिया



No comments:

Post a Comment